राहों का मुशाफिर हूँ निकल जाऊंगा,
बाहर निकलकर सम्हल जाऊंगा
इश्क़ के समंदर से दूर ही सही हूँ,
पास जाने से फिसल जाऊंगा।
मेरी मोहब्बत पर शक करने लगे हो,
शक करोगे तुम्हारे दिल से निकल जाऊंगा?
तुम बदले-बदले से लगते हो जनाब,
इस तरह न बदलो मैं भी बदल जाऊंगा।
इश्क़ में ज़हर पीना भी मंज़ूर है,
ज़हर दोगे खुशी-खुशी निगल जाऊंगा।