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हयात एक अल्फ़ाज़

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हयात ये रहा कि जीवन बीतता गया
        
                                                    
                            
कपड़े ख़त्म ना हुए
उसे बदलता रहा,
मैं तिथि और महीनों की तरह
जीते जी रहा ना कोई ग़म कपड़ों का ,
महज़ दोष सिर्फ़ रहा हयात का
हयात ये कि कपड़ा छोटा ,बड़ा , मोटा , पतला ,
विचार की तरह !
जिसे मैं बदलता रहा
सोम , मंगल , बुध , गुरु की तरह !
और अंतिम में कपड़ा बदल ना सका
हयात ये रहा कि
तन गड़ गया
और कपड़ा मात्र
एक
सफेद विचार बन कर रहा गया
हयात ये रहा कि जीवन बीतता गया ।
3 महीने पहले
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