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गणेश विसर्जन

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                            खुशियों का अम्बार लेकर,
        
                                                    
                            
बप्पा पधारे थे हमारे घर,
हर जगह खुशियों की रौनक थी,
फूलों और मोदक की खुशबू थी,
ढोल नगाड़े पर नाचना कूदना था,
आज आ गया था, बप्पा का विसर्जन का दिन,
ये विसर्जन नहीं उनकी विदाई थी,
कही खुशी तो कही ग़म था,
खुशी अगले बरस फिर आने की,
ग़म बप्पा से जुदा होने का,
माटी से बने माटी में ही मिल जाना था,
बस यही दुआ है - अगले बरस जल्दी आना।
-आकांक्षा गुप्ता
2 घंटे पहले
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