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एक अनसुलझी पहेली

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज मैंने खुद से एक सवाल किया,
        
                                                    
                            
इस मौन को तोड़कर,
इसका एक शांतिपूर्ण जवाब दिया।
मैं वो समंदर हूँ,
जिसके किनारे से लोग लौट जाते हैं,
मेरी गहराई तक पहुँचने से पहले,
अपना धैर्य खोकर मुझे आज़माते हैं।
कौन समझाए इस आवाम को,
कि मैं एक छोटी सी पहेली हूँ,
मुझे समझे बिना ही,
ये मुझे समझते हैं।
9 घंटे पहले
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Kaizad B.

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