अनुराग का दीया राधा ने हृदय में जलाये रखा,
नयनों के नीर में सदैव उसकी बाती को डुबाये रखा,
कभी ना कभी तो लौटकर आएगा ही मेरा कृष्ण -
इसी विश्वास में नेत्रों को अपलक टिकाए रखा।
- राजलक्ष्मी राज