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15 अगस्त आजादी जश्न और गर्व

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गर्व करो उन वीरों पर जो इस उपवन को सजा गये,
        
                                                    
                            
अपने प्राणों की आहूति दे जीवन की आस जगा गये।
आजादी का मोल कभी उन वीरों की समाधि से पूछना,
अपना सर्वस्व न्यौछावर कर जो हमें आजादी दिला गये।।

रानी दुर्गावती लक्ष्मी बाई आजादी की थी दिवानी,
अंग्रेजों से लोहा लेने की उन्होंने मन में थी ठानी।
अंग्रेज़ी शासन की नींव हिला कर करतब दिखाया,
अपनी मातृभूमि का कर्ज अपने खून से चुकाया।।

1857 की क्रांति अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील बनी,
उसके बाद विदेशी शासन से मुक्ति की एक उमंग जगी।
कितने वीरों के बलिदानों की यह लम्बी गाथा है,
कड़े संघर्षों के बाद ही कर्म का सुंदर बीज उग पाता है।।

आजाद भगतसिंह बिस्मिल सुखदेव राजगुरु और सावरकर,
नेता जी सुभाषचन्द्र बोस लाला लाजपत राय,होलकर।
गांधी की लाठी और मदनमोहन मालवीय का जागरण,
तब आया 15 अगस्त की स्वतंत्रता का वह शुभ दिन।।

14 अगस्त वह अशुभ दिन आजादी से पहले का विखंडन,
धर्म के नाम पर पूर्वी पश्चिमी पाकिस्तान का जन्म।
फूट डालो राज़ करो की अंग्रेजी कूटनीति का दास्तां,
जन्म से लेकर आज तक भारत अनेकों रूपों में भुगतता रहा।।

गर्व है हमें उन अमर शहीदों पर जो आजादी दे चले गए,
हमारे लिए इस राष्ट्र की सुरक्षा का भाव सौंप कर चले गए।
अपने राष्ट्र के उत्थान के लिए क्या कर सकते हैं हम जीवन में,
एक पौधा लगाया और उसके संरक्षण का सार हमें छोड़ गये।।
 
5 घंटे पहले
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