विज्ञापन

शर्तो वाली मोहब्बत

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शर्तों वाली मोहब्बत, घायल दिखी।
        
                                                    
                            
हकीकत जब जानी, कायल दिखी।।
लो रंग लाने लगी, उसकी गलतियाँ।
होशियारी रिश्तेदारी, जाली दिखी।।
एक ही तरकीब, उसकी बांकी रही।
मांफी माँगी, फिर वो घरवाली दिखी।।
जिन्दगी की सीख, वफा पर टिकी।
संग में 'उपदेश' के, खुशहाली दिखी।।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Chandra prakash

28 कविताएं

View Profile

rashmi gupta

191 कविताएं

View Profile