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साँसों में संवाद रमा है

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वाणी अब मूक पड़ी है।
        
                                                    
                            
साँसों में संवाद रमा है।।

कुसुम कणों से पूछ रही।
बुझे दीप में कहाँ शमा है।।

तू दूर चला जग शून्य हुआ।
बिन तेरे दिल कहाँ रमा है।।

मन तेरे चरणों में धर दूँ।
वेग पवन का कहाँ थमा है।।

ओ प्रियतम लौट के आजा।
नयनो में 'उपदेश' जमा है।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
11 घंटे पहले
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