विज्ञापन

अजब खेल है सच्चे-झूठे रिश्ते नातो का।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजब खेल है सच्चे-झूठे रिश्ते नातो का।
        
                                                    
                            
सफर जिन्दगी का खट्टी-मीठी बातों का।।

थामे बैठा कोई टीस हृदय में अपनों की।
समझौता में मिलावट है चुभती बातों का।।

कोई ओढ़े प्रेम की चादर भविष्य के लिए।
गृहस्थी में बदनामी का डर है हालातों का।।

मजबूर हर इंसान ढक कर रखे हुए गम।
कहते ही बिखर न जाए रूप आघातो का।।

प्यार में सहना बचपन से आया 'उपदेश'।
कोई लादे घूमता बोझ अनकही बातों का।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Anil Kumar

4216 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

616 कविताएं

View Profile