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पत्ते रंग बदलने लगे

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पेड़ को डाली पत्ते सँभालने की दिक्कत नही रही।
        
                                                    
                            
पत्ते रंग बदलने लगे संग रहने की ताकत नही रही।।

हवा का क़ुसूर नही मौसम परिवर्तन ही रहा होगा।
कभी रखते थे फ़ौलादी इरादे वैसी शिद्दत नही रही।।

खानदानी होने का कुछ तो फायदा मिला 'उपदेश'।
पर डालियों को हर तरफ झूमने की जिद्द नही रही।।

अक्खड़पन ने जीवन पद्धति का बड़ा नाश किया।
वक्त के हिसाब से चलने की कोई आदत नही रही।।

गिरना उनका क़ुसूर नही मजबूरी का आलम होगा।
मसले इतने बढ़ गए सुलझाने की हिम्मत नही रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
21 घंटे पहले
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