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इज़्ज़त प्यारी अपनी नही 'उपदेश'।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल आज भी वही ठहरा हुआ।
        
                                                    
                            
उमर के बढ़ने से अधमरा हुआ।।

अब लाइन के बाहर रहकर देखे।
लोगों की निगाह में बेचारा हुआ।।

हिम्मत से काम ना सीखा जरूर।
बेसब्री से उसका रंग गहरा हुआ।।

कभी-कभी उसकी यों याद आती।
लगता ऐसा जैसे खुदा बेहरा हुआ।।

इज़्ज़त प्यारी अपनी नही 'उपदेश'।
उसके खातिर डर का पहरा हुआ।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
10 घंटे पहले
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