विज्ञापन

तुम मुझे ढूंढो मैं तुम्हें ढूंढू

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम मुझे ढूंढो मैं तुम्हें ढूंढू।
        
                                                    
                            
मुस्कराने की वज़ह ढूंढू।।

पसन्द आई अगर लाइनें।
उन्हें कहने की वज़ह ढूंढू।।

तस्वीरें बदलती रहती है।
पहचान की हर वज़ह ढूंढू।।

उनपर हंसना काफी नही।
यादों में तुम्हारी वज़ह ढूंढू।।

जिस भीड़ में खोए 'उपदेश'।
आजाद दिल की वज़ह ढूंढू।।

मोहब्बत में फरेब कैसे करें।
आज मिलने की वज़ह ढूंढू।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
8 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kahar

5 कविताएं

View Profile