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ख्वाब में दिख जाते

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब से दिल में समाये निकलते ही नही।
        
                                                    
                            
हमारी गली में आजकल विचरते ही नही।।

रात का सन्नाटा हर रोज गहरा जाता।
ख्वाब में दिख जाते मगर पिघलते ही नही।।

हम दोनों में फर्क़ अब नजर आने लगा।
जानते सब कुछ मगर अमल करते ही नही।।

सहर आजकल खूबसूरत नही लगती।
दूर से देख लेते करीब आकर देखते ही नही।।

जो रूठा उसे मनाने की कोशिश जारी।
मेरे चाहने से क्या 'उपदेश' अपनाते ही नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
14 घंटे पहले
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