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खुशनसीब बड़ा

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लिखता हूँ ज़ख्म पीड़ा
        
                                                    
                            
लोग कहते खुशनसीब बड़ा
कुछ दर्द पुराने 'उपदेश'
जिनमें छुपा संगीन इल्ज़ाम बड़ा

बिखरे पन्नों के बीच में
कोई देखता ही नही मैं बिखरा पड़ा
एक पन्ने पर मोहब्बत दूजे में जुदाई
और पलटो कोई तन्हाई के बीच खड़ा

किसी पन्ने पर पाओगे
ख्वाबों की खूबसूरत बगिया जुड़ी
वही दुसरी तरफ धूप पसरी
कुछ एक जबाव न देने को अड़ी

लब चुप मिलेंगे आँखें बोलती
गाढ़ी स्याही से चिपका कीट प़डा
कुछ पन्ने मुड़े शायद ख़ास होंगे
मिलेगा वहाँ अधूरा अल्फाज़ प़डा

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
2 महीने पहले
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