कोशिश करके मैं हार गई।
फिर हिचकी आई तार गई।।
कब से समझाने की कोशिश।
उसकी बारी से आँखें चार हुई।।
इश्क का मौसम तंग लगा।
बेवजह की खिदमत मार गई।।
खता न होती यदि हम से।
करीबी बहार की बेकार गई।।
किसने दरीचे खोले 'उपदेश'।
धूप आकर पैर पसार गई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'