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दिल के जज़्बात

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहने भर से दिल के जज़्बात मरते नही।
        
                                                    
                            
तैश में जबरदस्ती गम दबाने से दबते नही।।

जो अपना कहता था छोड़कर निकल गया।
उसके वापिस आने के आसार दिखते नही।।

सुलगने का तरीका कोई नया नही उसका।
लाश की तरह जीने वाले यहाँ दिखते नही।।

दर्द जाहिर नही किया कमजोर है 'उपदेश'।
दिल के अन्दर छुपाये रहने से दिखते नही।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
एक वर्ष पहले
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