विज्ञापन

कानून की आँच झुलसा न सके उन्हें।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            त्याग दो कहने वाले समेटने में लगे।
        
                                                    
                            
जो समेट नही सके वो लूटने में लगे।।

धर्म अधर्म की परिभाषा गढ़ने वाले।
बेवजह नाराजगी जाहिर करने में लगे।।

आस्था में उम्मीद रखना धर्म समझते।
संसार भी त्याग देंगे पट्टी पढ़ाने में लगे।।

स्वर्ग नर्क कहकर डराते दूसरों को जो।
तरह-तरह के व्याभिचार करने में लगे।।

पाखण्ड जब सिर चढ़कर बोलने लगे।
धन्धा चलता रहे 'उपदेश' देने में लगे।।

कानून की आँच झुलसा न सके उन्हें।
घर में चोरी चोरी नही समझाने में लगे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Anil Kumar

4216 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

616 कविताएं

View Profile