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आदत सुधर रही

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर बात पर टुनकने की उम्र गुजर रही।
        
                                                    
                            
अब फ़िक्र कर उनकी आदत सुधर रही।।

झुकने लगे हैं अपनों के खातिर जब से।
तकरार करने की अब हिम्मत मुकर रही।।

जहाँ से उकसाने का फरमान जारी होता।
उनपर जाने अनजाने वक्त की कहर रही।।

नादान समझने लगे पैसो की अहमियत।
वक्त पर जिसने दिया 'उपदेश' मेहर रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
5 घंटे पहले
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