विज्ञापन

मां की ममता

Ujjwal kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मां के ममता को आज तक कौन तौल पाया!
        
                                                    
                            
जिसने मां को रुलाया है कहां सुख भोग पाया है

मां शीतलता है मां ही सुखों का अनंत छांव है।
जिसने मां को गाली दी है वक्त ने वही दोहराया है।।

जीवन उसी की देन हैं जिसे मां ने हमे उतारा है।
गहरा घाव सहा है उसने भी जिसने हमे अपनाया है।।

मां कौशल्या है, मां कैकई है और मां यशोदा है।
प्रेम का भाव हर रूप में रखा है और उसने दोहराया है।।

जन्मों जन्मों की का नाता मां से ही जुड़ता है हमारा।
मां की महिमा ईश्वर भी ना जाने जिसने उसे बनाया है।।
-उज्ज्वल कुमार
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile

Junaid Ahmad

5 कविताएं

View Profile

Sooba Lal

1 कविता

View Profile