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गंगा के तट पे

Trishika Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गंगा के तट पे वो मुझे मिलने बुला रहे
        
                                                    
                            
ह्रदय की शुष्क अवनि पे प्रणय खिला रहे
मन के भुवन में घोर तिमिर रात छाई थी
वो हर दिशा में प्रेम के दीपक जला रहे
— त्रिशिका धरा
7 घंटे पहले
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