कब लौटता बचपन
कौन अनुभव पाता
पीड़ा से आनंद
हर पल स्मरण
अपना ही तो
संस्मरण
कभी रेखाचित्र
तो बन जाता
रिपोर्ताज भी
अपने पड़ाव में
बचपन पाने की
दौड़
शिशु से बालपन
किशोरवय
सब कुछ वैसा
जैसाकि
उसने भोगा
घर आंगन
खेल कूद
लडझगडकर
जिद कर
अथवा
जिद्दी बन
कुछ कर
सपने पालकर
वापसी का स्पर्श
मातृत्व सुख के साथ
एक मां होने के साथ
सच सनातन से
शाश्वत भी
आगत अनागत
चिरकाल तक।