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मातृत्व सुख के साथ

देवसुधा पत्रिका

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कब लौटता बचपन
        
                                                    
                            
कौन अनुभव पाता
पीड़ा से आनंद
हर पल स्मरण
अपना ही तो
संस्मरण
कभी रेखाचित्र
तो बन जाता
रिपोर्ताज भी
अपने पड़ाव में
बचपन पाने की
दौड़
शिशु से बालपन
किशोरवय
सब कुछ वैसा
जैसाकि
उसने भोगा
घर आंगन
खेल कूद
लडझगडकर
जिद कर
अथवा
जिद्दी बन
कुछ कर
सपने पालकर
वापसी का स्पर्श
मातृत्व सुख के साथ
एक मां होने के साथ
सच सनातन से
शाश्वत भी
आगत अनागत
चिरकाल तक।
एक घंटा पहले
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S. L.

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