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जमीं और तुम

Sushil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दरियाओं से बेहतरीन कोई नजरा
        
                                                    
                            
गिरती हुए बूंदों ने हमको पुकारा

जमीं से आसमां तक धूल ही धूल
गिरी हुई बूंद ने किया इशारा

धरती निकली आसमां को चूमने जब
बादल बोल गए बीच में हक़ हमारा

रुसवाईयों की बदौलत पाताल में धंसी धरती
लौटा नहीं फिर वो जमीं आसमां का नजारा

'ग़ाफ़िल' हम भी तो थे इस धरा के दो फूल
इस जमाने को पता लगा क्या हुआ हमारा ।

सुसिल ग़ाफ़िल
2 वर्ष पहले
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