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बड़ी विचित्र छवि है

susheel baghel

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                            आजकल बड़ी विचित्र बात है
        
                                                    
                            
देश में कुछ अजीबनुमा माहौल है
मौसम में गर्मी आखों में नमी है
लोगो के जज्बातों में शर्मिन्दगी हैं

कहीं बाढ़ का है प्रकोप
तो कहीं सूखे की मार है
कहीं भुखमरी का है आलम
तो कहीं आतंकी घड़ी है
बड़ी विचित्र छवि है

नेताओ का है हाहाकार
बाबाओ की चर्चा बड़ी है
डोकलाम पर सेना खड़ी
देश में रेलम पेल मची है
बड़ी विचित्र छवि है

आस्था के नाम पर
अनुयायियों की धूम मची है
काश्मीर में जवान कहते
आतंकवादियो की हरकत बढ़ी हैं
बड़ी विचित्र छवि है

शांतिवार्ताओ की सभाओं में
हथियारों की प्रदशनी लगी है
सब बारूदों के ढेर पर खड़े
हाथों में जलती मशाल पड़ी हैं
बड़ी विचित्र छवि है

- सुशील अनजान

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9 वर्ष पहले
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