कुछ लोग हमारे प्रति ऐसा बर्ताव करते हैं,
जैसे घर में पड़ी वह कील—
जिसे संभालकर तो रखा जाता है,
मगर ज़रूरत पर ठोकर मारने के लिए
-सूर्यांश रीतम