चाँद फ़क्त ईद का है या मेरा भी है,
क्या ये किसी और का भी है, या केवल तेरा है?
हर नज़र में सवालों का सैलाब है,
क्या यह चाँद सबका है, या बस किसी का ख्वाब है?
या ये सिर्फ ईद का चाँद है I
यह चाँद फ़क्त एक रात की चमक नहीं,
यह जीवन के हर जद्दोजहद की दमक नहीं।
यह हमें बताता है कि दर्द किसी का भी स्थायी नहीं,
और हर कठिनाई में एक उजाला छिपा होता है कहीं।
यह चाँद फ़क्त मोहब्बत का प्रतीक नहीं,
यह आत्मविश्वास और साहस का पैगाम है।
यह हमें याद दिलाता है कि अंधेरे से भी निकलना है अभी,
हमें हर मुश्किल में आगे बढ़ते जाना है।
यह चाँद फ़क्त रौशनी नहीं,
यह हमारे भीतर के उजाले का पैगाम है।
यह न कभी खत्म होता है, न कभी थमता है,
यह हमें बताता जीवन जीने की एक तकनीक।
इस चाँद का पैगाम सरल है और गहरा भी,
सच्चाई यह है कि जीवन का अर्थ फ़क्त मोहब्बत नहीं,
बल्कि हर हाल में आगे बढ़ने का एक पैगाम है।