पूजित होता कर्म किसी का
और कोई दुत्कारा जाता
व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर है-
उसकी जग लीला का मंचन
कोई घृणा का पात्र बने है
कोई बन जाता है कंचन
कोई लोभ-मोह में फंसता
कोई परहित में है अग्रसर
परमारथ में जीने वाला-
कष्टों का संचय करता है,
पर मधुरिम रस की गठरी लेकर-
भव सागर से तरता है
जीता है मर करके भी वह
जीवन जिसने जगहित जिया
जीवन सार गहा जिसने
अमृत पान किया उसने
युगों-युगों तक इस सृष्टि में
जिह्वा-जिह्वा अविराम वही है
राम कृष्ण बुद्ध वंदित हैं
महावीर परशु अभिनंदित हैं
शिवा प्रताप हैं शीर्ष विमर्श
भोज हर्ष कृष्णदेव उत्कर्ष
सूर तुलसी कबीर निरन्तर
कालीदास रहीम अभ्यंतर
विक्रमादित्य, अशोक सम्राट
बिहारी केशव कृत विराट
शिवी दधीचि पर-हितकारी
महावीर विवेकानंद ज्ञान भंडारी
सीता राधा सावित्री अनुसुइया
जीजा लक्ष्मी पन्ना मन रमिया
उद्योत्तमा पद्मावती मीरा की कहानी
देशहित में दी वीरों ने जवानी
सुभाष शेखर भगत शौर्य को प्रणाम
भारत मां के वीरों का सम्मान
गांधी पटेल इंदिरा की शक्ति
लाल अटल मोदी की भक्ति
सब समाहित निरंतर धारा में
सुसुन्दर पुष्प सजे भारत में
मृदुल गीत - जो पायल का
बूटी का लेपन - घायल का
जवाब नहीं है - कायल का
कर्म अनुपम - लायक का
मधुरिम श्रवण - गायक का
करते अनुसरण - नायक का
कांटों में कोई पनप रहा
सुमनों में कोई दफन रहा
परिस्थितियों का कोई दास रहा
परिस्थितियां किसी की दास रही
किसी ने सही खूब कहा-
जो जीता वही सम्राट रहा
सुमनों पर चलना सरल बहुत
कांटों में खिलना है जीवन
कर्मकार की कहानी ही तो
है मंजिल वाली संजीवन
*******सुरेशपाल वर्मा जसाला
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