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प्रकृति की सुंदरता

Surekha Sahu

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रकृति की सुंदरता
        
                                                    
                            

प्रकृति की सुंदरता है अनुपम,
और छटा बहुत ही निराली,
जो है इसमें इतने सारे सुन्दर,
फूल - पत्ते, पेड़ और पौधे,
पशु - पक्षी , कीट –पतंगे,
और रंग बिरंगी तितलियाँ|

समझ में ना आता मेरे,
अनोखा यह रहस्य,
कैसे बनाया इन सबको,
अलग अलग एक दूसरे से,
और कैसे भरा रंग इनमें,
वो भी ना ना प्रकार |

हर पौधे का रूप अलग है,
पत्तियों का स्वरुप अलग है,
फूले की तो बात है निराली,
इतने रंग भरे है प्रकृति ने इनमें,
लगता घोल डाली इंद्रधनुष की सारी स्याही |

अगर बात करुं मैं तितली की,
समझ ना पाये मेरी छोटी बुद्धि,
कैसे होती है दोनों पंखो में सिमिट्री,
प्रकृति ने किया कैसे यह चमत्कार ,
विभिन्न रूप और रंग से सजे,
कैसे बनाये इतने प्रकार|

बनाने बैठी जब चित्र एक तितली का,
देखकर कॉपी करिश्मा कुदरत का,
की कोशिश गई सब बेकार ,
ना भर पाई वो रंग तितली में,
ना ही ला पाई वो सीमेट्री पंखों में|

पता नहीं देख कर कँहा से,
बनाया यह अनमोल खजाना ,
कैसे आया विचार मन में ,
जो बनाय इतने सारे प्रकार,
और कैसे भरे है इतने रंग कुदरत ने,
कैसे किया है यह असाधारण काम |

धन्य हूँ मैं प्रकृति तुम्हारी,
जो तुमने किया यह चमत्कार,
दिये हम सभी को इतने अनमोल उपहार ,
रखना है सहेज कर अब हम सबको,
प्रकृति का यह अनुपम वरदान |

सुरेखा साहू
8.1.19


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