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आजादी गान

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                            अमर वीरता की ये कहानी, वीरों का यह गान था।
        
                                                    
                            
हर जुवां पर इंकलाब और दिल में हिन्दुस्तान था ।।

मंगल पांडे ज्वाला जलाया,
अंग्रेजों के विरोध में।
लक्ष्मीबाई शमसीर उठायी.
माटी के प्रतिशोध में ।।
तात्या भील मामा के हाथों में भी तीर कमान था।
हर जुवां पर इंकलाब.............

भगत सिंह ने फांसीचाही,
आजाद ने गोली खाई थी।
नेताजी ने फौज बना.
गोरों को धूल चटाई थी ।।
ऊधम सिंह वीर हँसते-हँसते देश पर कुर्बान था।
हर जुवा पर इंकलाब................

सत्य. अहिंसा से गांधीने,
गुमान गोरों का तोड़ा था।
सरदार पटेल और नेहरू ने,
सारे भारत को जोड़ा था ।।
हो स्वतंत्र राष्ट्र हमारा यही सबका अरमान था।
हर जुवां पर इंकलाब...................

अक्षुण्ण रहे आजादी हमारी,
इसको नहीं गंवाना है।
विश्व पटल सिरमौर बनें हम
दुनिया को दिखलाना है।।
फिर से बनें सोने की चिड़िया. वीरों का वरदान था।
हर जुवां पर इंकलाब...................
- अजय 
एक वर्ष पहले
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