*चला गया - निभाता चला गया*
मैं सफर में तेरा साथ
निभाता चला गया,
निभाता चला गया,
वादियों का जश्न मनाना फिजूल था,
मनाना फिजूल था,
मैं सफर में हमसफर का साथ
निभाता चला गया,
हर कातिल को आँसुओं में
बहाता चला गया,
बहाता चला गया,
मैं बेबसी का जश्न
मनाता चला गया,
मनाता चला गया,
जो मिला उसी को प्यार में
नहलाता चला गया,
नहलाता चला गया,
जो मिला उसी को जल्वा समझ लिया,
तबस्सुम समझ लिया,
जो छूट गया उसी को
तकदीर समझ लिया,
उल्फ़त और क़यामत में
फ़र्क ना समझ सका,
मैं सफर को हुस्न में मिलता चला गया,
मैं हर ग़म को उल्फ़त में मिलता चला गया,
मैं हर सफर में हमसफर का साथ
निभाता चला गया,
निभाता चला गया