लुटाए भले ही तुझ पर वो दुनिया भर की दौलतें
तेरी ज़िंदगी को खुशियों से पर सजाएगा कहाँ
तू जिस शख़्स की खातिर बिछड़ रहा है मुझसे
वो मेरी तरह तुझसे मोहब्बत कर पाएगा कहाँ
वो गले लगाएगा जब भी मैं याद आऊँगा तुझको
तू मेरी यादों से बचकर ऐ यार बता जाएगा कहाँ
तुझको जो लिये थे ख़त और चाँदी का छल्ला
तू इन निशानियों को ज़ालिम दफ़नाएगा कहाँ
होगा तुझको जब तेरे इस फ़ैसले पर अफ़सोस
तू मुझसे मिलने की अर्ज़ियाँ फिर लगाएगा कहाँ
हमारे मज़हब में तो ऐ यार कब्र भी नहीं होती
तू माँगने मुझसे माफ़ियाँ फिर आएगा कहाँ