विज्ञापन

आशाओं के दीप

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दीये के साथ-साथ आशा के,
        
                                                    
                            
दीप बुझ गए हों जिसके,
पीछे रह जाती हैं उसकी स्मृतियाँ,
और उसे सच्चे मन से प्रेम करने वाले लोग।

समय भले ही चेहरे की पहचान मिटा दे,
पर स्मृतियों को मनुष्य कहाँ मिटा पाता है।
जिसने जीवन में प्रेम का प्रकाश बाँटा हो,
उसके जाने से हमारा संसार सूना हो जाता है।

दीप बुझ जाते हैं, पर उनका प्रकाश शेष रहता है,
आँखों में उसकी छवि सदा स्थिर रहती है।
वह दूर चला जाए, तो भी हृदय से कहाँ जाता है,
सच्चा प्रेम करने वाला स्मृतियों में सदैव मुस्कुराता है।

जिसके होने से जीवन का प्रत्येक कोना महकता था,
उसके बिना यहाँ प्रत्येक क्षण कठिन प्रतीत होता है।
दीये के साथ भले ही आशाओं के दीप बुझ जाएँ,
उसकी स्मृतियाँ मन में दीपक बनकर सदा जलती रहती हैं।
-सूबा लाल " अंजाना"
11 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

dinesh chauhan

3544 कविताएं

View Profile

Manoj Kumar

420 कविताएं

View Profile