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देश की माटी चंदन हैं कविता

Sonu KADERA

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देश की माटी चंदन है,
        
                                                    
                            
हिंदुस्तान में मानव अभिनंदन है ।।

कलम हमारी लिखती है
भारत सोने की चिड़िया
जहां बच्चे के खेलें गुड्डा
और गुड़िया

देश की माटी चंदन है
हिंदुस्तान में मानव अभिनंदन है

मैं लिखता हूं गीत पुराने है
मीर सुर तुलसी दोहे गीत सुहाने है

देश की माटी चंदन है
हिंदुस्तान में मानव अभिनंदन है

दिवाली में दीप स्वयं
अंधियारे को सहते हैं
देश को जगमग उजियारे
से भर देते हैं

देश की माटी चंदन है
हिंदुस्तान में मानव अभिनंदन है

माटी दीप को आकृति देती हैं
मानव को तो जागृति देती हैं

देश की माटी चंदन है
हिंदुस्तान में मानव अभिनंदन है

फूलों की कलियां मनुष्य की डलिया को सजाती है
देश के आंगन को फूल की खुशबू से मैं महकाती है

देश की माटी चंदन है
हिंदुस्तान में मानव अभिनंदन है

पंछी और पशुओ के सुर से प्रकृति मुस्काती है
सुन देश के वीरों की दहाड़ से दुश्मन की छाती थर्राती हैं

देश की माटी चंदन है
हिंदुस्तान में मानव अभिनंदन है
जिगर में प्रभू हमारे मांतपिता हैं
देश में बसी हुई संताने हैं

देश की माटी चंदन है
हिंदुस्तान में मानव अभिनंदन है

मिट्टी के खिलौने और उपयोगी वस्तु मिलती हैं
अब प्लास्टिक बॉटल का उपयोग पानी में किया जाता हैं

देश की माटी चंदन है
हिंदुस्तान में मानव अभिनंदन है

मिट्टी के आंगन में बचपन गुजरा है
बुढ़ापे जीव का संघर्षों में चलता है
एक दिन काया जलकर मिट्टी में मिलता है

 
9 महीने पहले
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