जो पैदा होने से पहले ही, कोख में मारी जाती है।
जो बेकसूर कहलाकर भी इस विकट सजा को पाती है।।
क्या हूं मैं लाचार वहीं? और क्या मैं वही बेचारी हूं?
मैं फिर भी कहती हूं हंसकर मैं नारी हूं, में नारी हूं।।
जिसके पढ़ने पर इस जग में, भूचाल सा इक आ जाता है।
जो खुलकर हंस दे कभी कहीं, तो सन्नाटा छा जाता है।।
मैनें ही सजाया ये जग है, फिर क्यों मैं नहीं तुम्हारी हूं?
क्या दोष है मेरा इतना ही? मैं नारी हूं, मैं नारी हूं।।
बचपन से ही क्यों हर कोई, बस मुझको यही बताता है?
दो कुल की इज्जत हांथों में, यह tag लगाया जाता है।
क्यों जबरन इज्जत दी जाती है? क्या मैं कोई भिखारी हूं?
या दोष मेरा बस इतना है, मैं नारी हूं, मैं नारी हूं।।
जो आया यौवन मुझ पर तो, इक मोह रचाया जाता है।
फिर शादी करके बच्चों को मुझे दिया थमाया जाता है।।
दे दी जाती है जिम्मेदारी क्या मैं कोई रखवाली हूं?
या दोष मेरा बस इतना है, मैं नारी हूं, मैं नारी हूं।।
मेरे पीछे ही क्यों है जग? क्यों मुझे संभाला जाता है?
हैवानों के हाथों में क्यों फिर दिया थमाया जाता है?
क्यों करते हो ignore मुझे? क्या मैं जिम्मेदारी हूं?
या दोष मेरा बस इतना है। मैं नारी हूं, मैं नारी हूं।।
वास्तव में नारी क्या है? बताया गया है --
मैं पद्मावती, मैं अवंतिका, मैं रानी लक्ष्मी बाई हूं।
जब जब ललकारा दुश्मन ने मैं कुरुक्षेत्र में आई हूं।।
ना लेना मुझसे लोहा तुम मैं इक तलवार पुरानी हूं।
तुम ना समझो कमजोर मुझे, मैं नारी हूं, मैं नारी हूं।।
मैं लक्ष्मी हूं, मैं दुर्गा हूं , और मैं ही काली माई हूं।
दुष्टों का करने को विनाश मैं इस संसार मैं आई हूं।।
हल्के मैं ना लेना मुझको मैं इस धरती से भारी हूं।
तुम ना समझो कमजोर मुझे, मैं नारी हूं, मैं नारी हूं।।
मैं हिम्मत हूं, मैं साहस हूं, मैं सूर्य की इक चिंगारी हूं।
मैं खंजर हूं, मैं चाबुक हूं, मैं तेज धार की आरी हूं।।
मैं नहीं हूं कोई साधारण, मैं जग को जनने वाली हूं।
तुम ना समझो कमजोर मुझे, में नारी हूं, मैं नारी हूं।।।
- शेख सोहिल मंसूरी