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साँस है जब तक

Shreyasi Satish

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खड़े हैं उसी रहगुज़र पर जो जाती है तुम तक,
        
                                                    
                            
याद आ रहें हैं वो फ़साने जो गुज़रे हैं अब तक।

निभाई सब रवायतें पर कम न हुआ कभी सितम,
टूट गए दिल के वो तार जो जुड़े थे अब तक।

तुमने कहा तो सुन लिया, हमने कहा तो सुना नहीं,
इस बेरूखी का आख़िर इंतज़ार करते कब तक।

भूलेंगे नहीं हम कभी वो चांदनी सी हंसी बातें,
जिए जाएँगे उन्हीं यादों के सहारे साँस है जब तक।
5 घंटे पहले
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