खड़े हैं उसी रहगुज़र पर जो जाती है तुम तक,
याद आ रहें हैं वो फ़साने जो गुज़रे हैं अब तक।
निभाई सब रवायतें पर कम न हुआ कभी सितम,
टूट गए दिल के वो तार जो जुड़े थे अब तक।
तुमने कहा तो सुन लिया, हमने कहा तो सुना नहीं,
इस बेरूखी का आख़िर इंतज़ार करते कब तक।
भूलेंगे नहीं हम कभी वो चांदनी सी हंसी बातें,
जिए जाएँगे उन्हीं यादों के सहारे साँस है जब तक।