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वो तेरी होकर भी न हुई, और पूरी उम्र उसी के नाम लिखी जाएगी।

शास्त्री जगमोहन रमण

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यही बात रह गई हमारी गोपन कथाओं को सब से बतलाओगी
        
                                                    
                            
मैं तुझे से दूर नहीं हु मगर ये बतलाओ तुम मेरे पास कब आओगी

अब तो रख दिया अपना शीश तेरी कदमों में
अब कहो ना आखिर कब तक ऐसे ही रुलाओगी

तेरी अनकही बातों को सुन उस के सहारे ही गुज़ारी हैं रातें,
कहो कब तक मेरी आँखों को ख़्वाबों में यूंही उलझाओगी।

तेरी बेहतर मंज़िल की तलाश में कही ये रास्ते छूट न जाए,
अगर तू लौटकर फिर मिलने न आई तो बता किसको अपना हाल सुनाओगी।

तेरे जाने से मेरे वजूद में इक ख़ला-सा रह गया,
मैं जो खुद में लौट भी आऊँ तो तुम मुझसे दूर हो जाओगी

शास्त्री तेरे हिस्से में बस इतनी-सी मोहब्बत आई,
वो तेरी होकर भी न हुई, और पूरी उम्र उसी के नाम लिखी जाएगी।
एक दिन पहले
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