मेरे सपनो के पंख नहीं, फिर भी वे उड़ते हैं,
इतने ऊँचे इतने ऊँचे, कि पंछी भी रहते नीचे।
पंछी उड़े देश विदेश में, पर ये तो उड़े हर लोक में,
पंछी शायद थक जाते होंगे, और फिर सो जाते होंगे,
पर ये नहीं करते आराम, सोने पर तो ये और भी तेज उड़ते।
इनकी भी देखो कैसी माया, पंछी को देखे दुनिया सारी,
पर मेरे सपनो को तो में ही देखूं,
इनको भी देख सकती है दुनिया सारी,
अगर मैं इनको सच कर दूं।