साथ तेरा मुझे हमनवा चाहिए
जैसे तारों को ये आसमा चाहिए
फूल खुशबू की भांति रहें साथ हम
जब तलक है ये कायम धरा चाहिए
सात जन्मों की बातें करें क्यूं भला
हर जनम मैं जहां तू वहां चाहिए
मैं हूं शायर तेरा, शायरी तू मेरी
धड़कनों में मेरी तू बसा चाहिए
स्वप्न बन के तुम ही तुम रहो नयन में
मुझको इनमें न तुम्हारे सिवा चाहिए
चांद संग चांदनी राग संग रागनी
साथ मोहन के ज्यों राधिका चाहिए
-शैलेश अग्रवाल "नीर"