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'अभिनंदन का अभिनंदन' करती, कलम वीर का वंदन करती

SAURABH SINGH

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                            शौर्य गाथाओं को लिखता गर्व से हूं
        
                                                    
                            
हूं नहीं लिखता कभी भी कायरों की मैं कहानी,
है कलम जो हाथ में तो क्या हुआ
है नहीं अब तक मरा आंखों का पानी।
वीर जिसका शौर्य अपने आप में कहता कहानी,
दुश्मनों के मुल्क में भी छोड़कर आया निशानी।
दुश्मनों की भीड़ में भी जो अकेला डटकर खड़ा था,
कायरों की फौज से जो घर में घुसकर के लड़ा था।
मिग-21 से जिसने एफ-16 को भी मार गिराया,
वीर अपनी शौर्य गाथा लिखके घर को लौट आया।

- सौरभ सिंह

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7 वर्ष पहले
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