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तरकीब बता ऐ जिंदगी

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुद को खुद से छुपाने की
        
                                                    
                            
तरकीब बता ए जिंदगी !
सूरत-ऐ-हाल को बदल पाने की
तरकीब बता ए जिंदगी !

स्याह रात की सुबह
नजर नहीं आती
उजाले की कोई किरण
नजर नहीं आती
अंधेरों से बाहर आने की
तरकीब बता ऐ जिंदगी !
जीने का हौसला जगाने की
तरकीब बता ऐ जिंदगी !

खुद को आईने में देखूं
तो नजरें झुक जाती हैं
कुछ ख़यालात आते ही
साँसे रुक जाती हैं
माज़ी को भूल जाने की
तरकीब बता ऐ जिंदगी !
परेशां हूँ, संभल जाने की
तरकीब बता ऐ जिंदगी !

यूं ही जीना है ऐ जिंदगी !
तो क्यूँ हो उम्र बड़ी
कुछ यूं हो कि बिखर जाए
टूट कर सांसों की लड़ी
सांसों का बोझ उठाने की
तरकीब बता ऐ जिंदगी !
या इस वजूद को मिटाने की
तरकीब बता ऐ जिंदगी !
-सत्यपाल सिंह
3 महीने पहले
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