मौसम को मत देख,
मौसम का अपना मिज़ाज है ।
मंज़िल तेरी है,
तेरी ही राह है ।
तू चले या रूके,
मौसम बेपरवाह है ।
धूप की तपिश से न डर ।
तप्त पथ पर चल निरन्तर
मेघ न उडेगा कोई
तेरे लिए छाया बनकर
असीम, अनंत है आस्मां,
हौसलों के पंख लगा,
उड, जहां तक उड सके,
आसमां तेरा है,
तेरी ही परवाज है ।।
मौसम को मत देख,
मौसम का अपना मिज़ाज है ।।
शिशिर की धुंध हो,
मौन, धुँधला पथ रहे ।
हर विघ्न पार कर,
चलना अनवरत रहे ।
सर्द हवाओं के झोंके,
रोकेंगे राह तेरी ।
सूरज भला क्यूँ,
करेगा परवाह तेरी ।
खिली धूप की चाह में,
रूक मत राह में ।
कल नहीं, मंज़िल पर
पहुंचना आज है ।।
मौसम को मत देख,
मौसम का अपना मिज़ाज है ।।
-सत्यपाल सिंह