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रातें कितनी भी स्याह हों

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रातें कितनी भी स्याह हों
        
                                                    
                            
सपने कितने भी खौफनाक हों ।
हर सहर मेरी ख़ुशनुमा हो अगर
नींद टूटे और तेरे दीदार हों ।।
-सत्यपाल सिंह
4 महीने पहले
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