जो दूर हैं उन्हें , ढूँढती हैं निगाहें ।
जो पास हैं उनसे, हम मिलते नही हैं ।।
जब रात का अंधेरा
डराता है हमें,
दिन के उजाले,
याद आते हैं ।
फिर वजह क्या है,
किस डर से,
दिन में भी घर से,
हम निकलते नही हैं ।।
फुर्सत के लम्हों में,
करते हैं वादे,
मंजिल तक हम,
साथ चलेंगे ।
सफर में मगर,
हमसफ़र बनकर,
दो कदम भी साथ,
हम चलते नही हैं ।।
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