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इजहार-ए-ख्याल (शिकवा)

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरी साँसो की महक से
        
                                                    
                            
महकी हैं गैर की रातें ।
मैं अब किस हक से कहूँ
इन सांसो पर मेरा हक है ।।

तेरी शोखी, तेरा हंसी, तेरी हया,
सब बेशकीमती थे मेरे लिए ।
काश ! समझ लेती मेरे जज़्बात
उनका सौदा करने से पहले ।।
-सत्यपाल सिंह
6 महीने पहले
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