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इज़हार-ए-ख़याल (रिश्ते )

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नम आंखों को
        
                                                    
                            
यह कहकर तसल्ली देता हूँ ।
कि आँसू देने वाले
अपने ही हैं गैर नहीं ।।

 
3 महीने पहले
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