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इज़हार-ए-ख़याल

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन की पीड़ा मन में रख
        
                                                    
                            
चेहरे की उदासी छिपाता चल ।
उनकी हरकतों को नजर-अंदाज कर
जब तक हो रिश्ते निभाता चल ।।

रिश्तों के बगीचों में
ज़रा संभल के चला करो ।
यहाँ फूलों की क्यारियों में
कांटों की टहनियां भी हैं ।।

बात शुरू भी तुम करो
बात खत्म भी तुम करो ।
कुछ तो रहने दो मेरे पास
भ्रम में जीने के लिए ।।
-सत्यपाल सिंह
4 महीने पहले
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