बहारें सदा रहती हैं लालायित
तेरे पैरहन से ख़ुशबू चुराने के लिए ।
तेरी तस्वीर-ए-ख़याली ही काफ़ी है
मेरे दिल को महकाने के लिए ।।
-सत्यपाल सिंह