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अंतिम पट गिरने वाला है

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक रथ थमने वाला है
        
                                                    
                            
एक रथ चलने वाला है ।
है पहुंचना तय मंजिल पर
अखंड पथ सजने वाला है ।।

न मन में धर कोई चाह अब
मुस्कुरा - न भर कोई आह अब ।
भंवर जाल का पिंजरा तोड़
भ्रमित खग उड़ने वाला है ।।

क्यों चित अशांत, व्यथित मन है
है गमन तय उसका, जो चेतन है ।
हुआ नाट्य अंत, अब रंगमंच का
अंतिम पट गिरने वाला है ।।
-सत्यपाल सिंह
3 महीने पहले
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