आसमान विचलित हो जाता,
धरती विध्वंस मचाती है।
हर वीर वतन का झूम उठे,
जब रणभेरी बज जाती है।।
मन का सागर लहराता है,
तन शौर्य गाथा गाता है।
बहने को वतन की वेदी पर,
रक्त रगों से बगावत कर जाता है।।
नदियां बलिदानी गीत सुनाती,
कुर्बानी शौर मचाती है।
जब जब दुश्मन दुस्साहस करे,
वीरों की तनती छाती है।।
उतंग हिमालय हिम्मत देता,
सिंधु साहस भर लाता है।
भारत का हर बच्चा बच्चा,
वज्र कथानक गाता है।।
हर कहानी, हर गीत यहां,
इतिहास यही दोहराते हैं।
सरहद पर मिटने वालों के बेटे,
फिर सरहद पर लङने जाते हैं।।
खून से लिखी कहानी वीरों की,
अमिट लकीरें बन जाती हैं।
दुश्मन की हर एक चाल पर,
यहां प्रलय की आंधियां छाती हैं।।
हर भारतवासी की शान तिरंगा,
जब जब अम्बर में लहराता है।
भारत मां मुस्कुराती है,
शत्रु का सीना थर्राता है।।
शब्दों में,शौर्य उबल रहा,
भावों में भारत की ख्याति है।
ऐ वतन तुझे तन-मन से सलामी,
तेरा गौरव हर दिल की थाती है।।
-संतराम शर्मा'हिन्दी'