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एक निशानी हूँ मैं

Santosh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रख सको तो एक निशानी हूँ मैं
        
                                                    
                            
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं
रोक ना पाए जिसको ये सारी दुनिया
वो एक बूंद आँख का पानी हूँ मैं...

सबको प्यार देने की आदत है हमें
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमें

कितना भी गहरा ज़ख़्म दे कोई
उतना ही ज्यादा मुस्कुराने की आदत है हमें..

इस अजनबी दुनिया में अकेला ख़्वाब हूँ मैं
सवालों से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं
जो समझ ना सके मुझे उनके लिए कौन
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं..

आँख से देखोगे तो खुश पाओगे
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं
अगर रख सको तो एक निशानी हूं मैं
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं...

- संतोष कुमार सिंह 
एक महीने पहले
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