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सफर मे अकेला छोड़ गए..

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सफ़र में अकेला छोड़ गए,
        
                                                    
                            
मगर कोई गिला नहीं उनसे।
कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रह जाते हैं,
शायद यही उनकी तक़दीर होती है।
हम आज भी उसी राह पर मुस्कुरा लेते हैं,
जहाँ कभी उनके क़दमों की आहट सुनाई देती थी।
वो अपनी मंज़िल पा गए,
और हम यादों को अपना हमसफ़र बना बैठे।
इश्क़ हो, दोस्ती हो या ज़िंदगी—
हर सफ़र हर किसी के साथ पूरा नहीं होता।
कुछ लोग बस इतना ही लिखने आते हैं,
कि एक अधूरी कहानी भी उम्र भर याद रहे..!!
-संजय श्रीवास्तव
2 महीने पहले
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